मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है जहां आमतौर पर युद्ध के समय Gold Silver की कीमतें बढ़ती हैं, वहीं इस बार इनकी कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
इस गिरावट ने कमोडिटी मार्केट और निवेशकों दोनों को हैरान कर दिया है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि पारंपरिक “सेफ हेवन” रणनीति बदल रही है और बाजार में नए फैक्टर काम कर रहे हैं।
37 दिनों में चांदी ₹50,000 तक टूटी
सबसे पहले बात चांदी की करें, तो 27 फरवरी को MCX पर चांदी का वायदा भाव ₹2,82,644 प्रति किलो था। लेकिन 37 दिनों के युद्ध के दौरान यह गिरकर ₹2,32,600 प्रति किलो पर आ गया।
यानी कुल मिलाकर चांदी करीब ₹50,044 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। अगर हाई लेवल से तुलना करें, तो चांदी में ₹2 लाख से ज्यादा की गिरावट देखी गई है जो कमोडिटी मार्केट के लिए बेहद असामान्य मूव है।
सोना भी नहीं बचा, ₹16,000 तक गिरावट
सोना भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा। 27 फरवरी को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,65,659 प्रति 10 ग्राम था, जो 2 अप्रैल तक गिरकर ₹1,49,650 पर पहुंच गया।

इस हिसाब से सोना ₹16,000 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो चुका है। अगर लाइफटाइम हाई ₹2,02,984 से तुलना करें, तो सोना अब ₹53,000 से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है जो बड़े करेक्शन का संकेत देता है।
Revenue और मार्केट वैल्यू पर असर
हालांकि Gold Silver कंपनियां सीधे “Revenue” रिपोर्ट नहीं करतीं जैसे कॉरपोरेट कंपनियां करती हैं, लेकिन इस गिरावट का असर पूरे कमोडिटी सेक्टर की वैल्यू पर पड़ा है।
- ज्वेलरी कंपनियों की इन्वेंट्री वैल्यू घटी
- ट्रेडिंग वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव बढ़ा
- कमोडिटी एक्सचेंज पर मार्जिन प्रेशर बढ़ा
यह गिरावट अप्रत्यक्ष रूप से सेक्टर के मुनाफे (Profitability) को प्रभावित कर सकती है।
Year-on-Year ट्रेंड: क्या बदल गया?
अगर पिछले साल की तुलना करें, तो सोना-चांदी ने 2025 में मजबूत रिटर्न दिया था। लेकिन 2026 में यह ट्रेंड उल्टा हो गया है।
- YoY आधार पर सोने की ग्रोथ धीमी पड़ी
- चांदी में हाई वोलैटिलिटी देखने को मिली
- निवेशकों का रुख “कमोडिटी” से हटकर “कैश और डॉलर” की ओर गया
बाजार की प्रतिक्रिया: निवेशकों में घबराहट
इस गिरावट के बाद बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
- रिटेल निवेशक घबराए हुए हैं
- बड़े निवेशक (Institutional Investors) ने प्रॉफिट बुकिंग की
- ETF में गोल्ड होल्डिंग्स में कमी देखी गई
कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए यह समय बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

आखिर युद्ध के बीच क्यों टूटे Gold Silver?
यह सबसे बड़ा सवाल है जब युद्ध हो रहा है, तो कीमतें गिर क्यों रही हैं?
1. डॉलर की मजबूती
युद्ध के दौरान निवेशक “सेफ हेवन” के तौर पर डॉलर की ओर भागे।
डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर बना हुआ है, जिससे सोने पर दबाव आया।
2. कच्चे तेल की कीमतें
क्रूड ऑयल $110 प्रति बैरल के आसपास है।
इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है और निवेशक कैश होल्ड करना पसंद कर रहे हैं।
3. लिक्विडिटी की जरूरत
अनिश्चितता के समय निवेशक कैश निकालते हैं।
सोना-चांदी बेचकर नकदी जुटाई जा रही है।
4. प्रॉफिट बुकिंग
पिछले साल के हाई रिटर्न के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूला।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार:
- यह गिरावट “शॉर्ट टर्म करेक्शन” हो सकती है
- अगर युद्ध लंबा चला, तो फिर से सोना उछल सकता है
- लेकिन फिलहाल डॉलर और ब्याज दरें बड़ा रोल निभा रही हैं
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ₹1,45,000 के आसपास सोने में मजबूत सपोर्ट बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?
- घबराकर बिकवाली न करें
- SIP या चरणबद्ध निवेश अपनाएं
- पोर्टफोलियो में 10–15% गोल्ड रखें
- शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से बचें
आगे क्या?
अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, तो सोना फिर से “सेफ हेवन” की भूमिका निभा सकता है। लेकिन अगर डॉलर मजबूत बना रहा, तो दबाव जारी रह सकता है।
FAQs
Q1. युद्ध के दौरान Gold Silver क्यों गिर रहे हैं?
डॉलर की मजबूती, महंगाई का डर और कैश की बढ़ती मांग इसके मुख्य कारण हैं।
Q2. क्या यह सोना खरीदने का सही समय है?
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छा अवसर माना जा सकता है, लेकिन चरणबद्ध निवेश बेहतर रहेगा।
Q3. क्या आगे सोना फिर बढ़ेगा?
अगर जियो-पॉलिटिकल तनाव लंबा चलता है, तो सोना दोबारा तेजी दिखा सकता है।
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